o समधी धोती – 1 नग
· विशेष परिस्थिति में माय कापर एवं भौजाई लुगा की संख्या आपसी सहमति से सीमित की जा सकती है।
12. अंगूठी संबंधी नियम
· अंगूठी पहनाने की स्थिति में तांबे की अंगूठी का ही उपयोग करना उचित होगा।
13. छोर-छुटी (तलाक) के उपरांत बच्चों का अधिकार
· सामान्यतः बच्चों पर पिता का अधिकार रहेगा।
· यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो बच्चों का पालन-पोषण आपसी सहमति से तय किया जा सकता है।
· सहमति न होने पर पिता को ही अधिकार प्राप्त होगा।
1. विशेष प्रावधान:
· यदि छोटा बच्चा हो, तो माता पति की सहमति से 5 वर्ष की आयु तक अपने पास रख सकती है।
· 5 वर्ष पूर्ण होने पर बच्चे को पिता को सौंपना अनिवार्य होगा।
· बच्चे के पालन-पोषण हेतु आर्थिक सहयोग की राशि समाज द्वारा परिस्थिति अनुसार निर्धारित की जाएगी।
2. घरजमाई (लमसेना) की स्थिति में:
· यदि पिता ससुराल में रह रहा है, तो बच्चों पर माता का अधिकार माना जाएगा।
· आपसी सहमति होने पर निर्णय बदला जा सकता है।
14. पुनर्विवाह का अधिकार
· छोर-छुटी के पश्चात् स्त्री एवं पुरुष दोनों को नया जीवन साथी चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी।
· पूर्व पति-पत्नी एक-दूसरे पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकते।
15. द्वितीय विवाह (अनुचित संबंध) पर सामाजिक दंड
यदि समाज की समझाइश के बाद भी संबंध समाप्त नहीं किए जाते, तो निम्न दंड लागू होगा:
(क) विवाहित पुरुष + अविवाहित महिला
· दोनों पक्षों से ₹25,000/-
· पहली पत्नी को अतिरिक्त ₹25,000/-
(ख) अविवाहित पुरुष + विवाहित महिला
· दोनों पक्षों से ₹50,000/-
· पूर्व पति को बूंदा राशि अलग से
(ग) विवाहित पुरुष + विवाहित महिला
· दोनों पक्षों से ₹50,000/-
· पहली पत्नी को ₹25,000/-
· पूर्व पति को बूंदा राशि
नियम:
· दंड उपरांत ही उन्हें पति-पत्नी का सामाजिक दर्जा दिया जाएगा।
· समाज परिस्थिति अनुसार दंड में परिवर्तन कर सकता है।
· असहमति होने पर संबंधित पक्ष न्यायालय जाने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
16. लमसेना (घर जमाई) नियम
· घर जमाई रखते समय संपत्ति संबंधी स्पष्ट लिखित समझौता समाज के समक्ष किया जाना आवश्यक होगा।
· यदि जमाई नियमों का उल्लंघन करता है या स्वेच्छा से अलग होता है, तो वह संपत्ति के अधिकार से वंचित हो जाएगा।
· ऐसी स्थिति में समाज/समिति अंतिम निर्णय लेगी।
17. नेंग-जोग (रस्मों की राशि सीमा)
· करस पूजा, मंडवा, भाजी, द्वार छेकाई आदि रस्मों में ढेड़हीन द्वारा ली जाने वाली राशि:
o कुल अधिकतम ₹700/- या
o प्रति रस्म अधिकतम ₹100/-
· इससे अधिक राशि की मांग करना नियम विरुद्ध माना जाएगा।
18. गैर समाज विवाह
· यदि समाज की लड़की किसी अन्य समाज में विवाह करती है, तो उसे पैतृक संपत्ति में अधिकार नहीं मिलेगा।
· इस नियम का पालन अनिवार्य होगा।
19. विवाह पंजीयन एवं प्रमाण पत्र
· विवाह का पंजीयन अनिवार्य होगा।
· ग्राम स्तरीय समिति में ₹500/- शुल्क जमा कर पंजीयन कराया जाएगा।
· विवाह उपरांत प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक होगा।
20. विवाह पंजीयन प्रक्रिया
· दोनों पक्ष अपने-अपने ग्राम समिति के पंजी विवाह स्थल पर लाएँगे।
· विवाह पंचनामा में निम्न विवरण दर्ज किए जाएँगे:
o दिनांक
o वर-वधु का नाम
o माता-पिता का नाम
o आयु, गोत्र, पता
o उपस्थित प्रमुख रिश्तेदार एवं सगा-सियान
· सभी संबंधित व्यक्तियों के हस्ताक्षर/अंगूठा निशान लिए जाएँगे।
· इसी आधार पर ग्राम समिति विवाह प्रमाण पत्र जारी करेगी।
· आवश्यकता होने पर ब्लॉक/जिला स्तर से भी प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है (₹500 शुल्क)।
मृत्यु संस्कार : कंवर समाज में मृत्यु के पश्चात् किए जाने वाले क्रियाकर्म
कंवर समाज में मृत्यु के पश्चात् सभी क्रियाकर्म पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार किए जाते हैं। इन क्रियाओं का उद्देश्य मृत आत्मा के प्रति सम्मान प्रकट करना तथा परिवार और समाज को एकजुट रखना है।
1. सामान्य सिद्धांत
- मरनी-हरनी के सभी क्रियाक्रम कंवर जनजाति की पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न किए जाएंगे।
- शोकाकुल परिवार अकेले सभी खर्च वहन नहीं करेगा। समाज के अन्य परिवार दाल, चावल, नगद राशि अथवा अन्य आवश्यक सामग्री देकर सहयोग करेंगे।
- समाज में मृत्यु पंजीयन कराना अनिवार्य होगा, जिसके लिए निर्धारित शुल्क ₹100 रहेगा।
- मृत्यु संस्कार में अनावश्यक खर्च, अंधविश्वास या ऐसे कर्मकांड से बचना चाहिए जिससे शोकाकुल परिवार पर आर्थिक बोझ पड़े। समाज में वैज्ञानिक और तार्किक सोच को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
मृत्यु संस्कार की दिनवार प्रक्रिया
पहला दिन : माटी-संस्कार
- मृत्यु होने पर सभी नजदीकी संबंधियों के आने के बाद माटी-संस्कार (दफनाना / माटी देना) किया जाएगा।
- सामान्यतः माटी-संस्कार सूर्यास्त के बाद नहीं किया जाएगा, परन्तु विशेष परिस्थिति में किया जा सकता है। यदि मृत्यु शाम या रात में हो तो माटी-संस्कार अगले दिन किया जाएगा।
- माटी-संस्कार का कार्य पुरुषों द्वारा किया जाएगा।
- महिलाएँ तवा-झाड़ू निकाली कर घाट में जाकर मुखारी-पानी देंगी।
- कफ़न केवल 1-2 नजदीकी रिश्तेदार ही देंगे। अन्य लोग पुष्पांजलि के रूप में फूल, गुलदस्ता या पुष्पचक्र अर्पित कर सकते हैं।
- पहले दिन घर के लोग पितांगी (बिना नमक-तेल का भोजन) ग्रहण करेंगे, जिसे दूसरे गोत्र के लोग बनाकर देंगे।
- जिस दिन माटी-संस्कार होगा, उसी दिन को पहला दिन माना जाएगा।
दूसरा दिन : मुखारी-पानी
- सुबह घर की महिलाएँ घाट में जाकर मुखारी-पानी देंगी।
- इस दिन भी घर के लोग पितांगी (बिना नमक-तेल का भोजन) ही ग्रहण करेंगे।
तीसरा दिन : तीज नहावन
- तीसरे दिन तीज नहावन की रस्म संपन्न की जाएगी।
- घाट से वापस आने के बाद दूसरे गोत्र की महिलाएँ घर और गोत्र की महिलाओं को मुड़तेला (तेल-टीका) देंगी।
- इस दिन घर के लोगों तथा आए हुए अतिथियों के लिए सामान्य भोजन (नमक-तेल सहित) बनाया जाएगा।
चौथा से आठवाँ दिन
- चौथे दिन से आठवें दिन तक प्रतिदिन सुबह घर तथा आसपास की महिलाएँ घाट में जाकर मुखारी-पानी देंगी।
नौवाँ दिन : पइन-नहावन
- नौवें दिन पइन-नहावन की रस्म संपन्न की जाएगी।
- इस दिन सभी महिलाएँ घाट में जाकर मुखारी-पानी देंगी।