Kanwar Society Rules Part 03

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शिक्षा एवं जागरूकता

1.   प्रस्तावना एवं मूल दृष्टि

किसी भी समाज का वास्तविक उत्थान उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है। कंवर समाज का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित, जागरूक एवं आत्मनिर्भर बने।

शिक्षा का अर्थ केवल स्कूली शिक्षा नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, व्यावसायिक, वैज्ञानिक, तकनीकी, खेल-कूद एवं संवैधानिक ज्ञान भी सम्मिलित है।

सभी को कंप्यूटर, मोबाइल एवं सूचना प्रौद्योगिकी का ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक होगा। शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षरता नहीं, बल्कि अधिकारों के प्रति जागरूक होकर समाज एवं राष्ट्र के विकास में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।

2.   अनिवार्य शिक्षा एवं प्रवेश व्यवस्था

1.   कंवर समाज के 06 से 18 वर्ष तक के सभी बालक/बालिकाओं के लिए विद्यालयी शिक्षा अनिवार्य होगी।

2.   प्रत्येक बालक/बालिका के लिए न्यूनतम 12वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त करना आवश्यक होगा।

3.   शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक एवं व्यावसायिक शिक्षा देना भी अनिवार्य होगा।

4.   सभी स्तरों पर शिक्षा के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

3.   सामाजिक दायित्व एवं अनुशासन

1.   यदि कोई अभिभावक अपने बच्चे को शिक्षा से वंचित रखता है, तो संबंधित सभा/समिति द्वारा प्रति बच्चा अधिकतम ₹1000 तक सामाजिक दंड निर्धारित किया जा सकता है।

2.   गंभीर लापरवाही की स्थिति में सभा/समिति द्वारा आवश्यक सामाजिक निर्णय लिया जा सकता है, जिसमें मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाएगी।

4.   शिक्षा संवर्धन एवं समाज की भूमिका

1.   सभी सरकारी शैक्षणिक योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाने हेतु समाज को सक्रिय रहना होगा।

2.   समाज के शिक्षित एवं बुद्धिजीवी वर्ग का दायित्व होगा कि वे अन्य सदस्यों को शिक्षा हेतु प्रेरित एवं मार्गदर्शित करें।

3.   “पे बैक टू सोसाइटी” की भावना को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत सक्षम व्यक्ति समाज की शिक्षा एवं विकास में योगदान देगा।

5.    संस्थागत विकास एवं शिक्षा विस्तार

1.   समाज/संगठन द्वारा शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना हेतु निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

2.   आवश्यकता अनुसार प्रौढ़ शिक्षा एवं निरक्षरता उन्मूलन कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

6.   आर्थिक सहयोग एवं विशेष संरक्षण

1.   आर्थिक रूप से कमजोर एवं मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा हेतु सहायता दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।

2.   अनाथ एवं वंचित बच्चों की शिक्षा हेतु विशेष सहयोग, संरक्षण एवं मार्गदर्शन की व्यवस्था की जाएगी।

7.   व्यक्तित्व विकास एवं प्रशिक्षण

1.   सभी सदस्यों के व्यक्तित्व विकास हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें शिष्टाचार, संवाद कौशल एवं व्यवहारिक ज्ञान शामिल होगा।

8.   सांस्कृतिक एवं पारंपरिक शिक्षा

2.   सभी को सामाजिक शिक्षा (कंवरान प्रशिक्षण) दी जाएगी।

3.   पारंपरिक ज्ञान, लोककला एवं सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण एवं प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

4.   इस प्रशिक्षण की जिम्मेदारी ग्राम, खण्ड एवं जिला स्तर की समितियों की होगी।

9.   प्रोत्साहन एवं सम्मान

  1.   शिक्षा, खेल, संस्कृति एवं समाजसेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र/छात्राओं को ग्राम, खण्ड एवं जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
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